किशोरी की मौत: पालतू कुत्ते के खरोंच को नजरअंदाज करने पर रेबीज से हताहत
थूथुकुडी: तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में एक दुखद घटना में 11वीं कक्षा की एक 16 साल की छात्रा की रेबीज होने से मौत हो गई. कहा जा रहा है कि उसे अपने पालतू कुत्ते के खरोंचने की वजह से रेबीज हुआ था, जिसका इलाज नहीं किया गया.
घटना और मेडिकल डायग्नोसिस
ओट्टापिदारम के पास पुथियामपुथुर की रहने वाली स्टूडेंट को करीब दो महीने पहले घर पर खेलते समय उसके पालतू कुत्ते ने खरोंच दिया था. परिवार के सूत्रों के मुताबिक उसे खरोंच गंभीर नहीं लगी और उसने अपने माता-पिता को नहीं बताया. 28 मार्च को उसे तेज बुखार हुआ. जब दवा से उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो उसे थूथुकुडी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने कन्फर्म किया कि उसे रेबीज हो गया है. फिर उसे एडवांस इलाज के लिए मदुरै राजाजी गवर्नमेंट हॉस्पिटल रेफर किया गया. हालाँकि, मेडिकल मदद के बावजूद उसकी मौत हो गई.
प्रोटोकॉल और अंतिम संस्कार
रेबीज वायरस होने की वजह से हॉस्पिटल अधिकारियों ने बॉडी सीधे परिवार को नहीं दी. हेल्थ सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मदुरै के एक श्मशान घाट में सरकारी देखरेख में अंतिम संस्कार किया गया.
मेडिकल एडवाइजरी
डॉक्टरों ने कहा कि समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन से मौत को रोका जा सकता था, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कुत्ते या बिल्ली जैसे पालतू जानवरों से मामूली खरोंच भी वायरस फैला सकती है. रेबीज एक जानलेवा है लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारी है. किसी भी जानवर के काटने या खरोंच के बाद तुरंत इलाज जरूरी है. इसमें घाव की सफाई और वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है.
तमिलनाडु में बढ़ती चिंता
हेल्थ अधिकारियों ने पूरे तमिलनाडु में रेबीज के मामलों में बढ़ोतरी देखी है. अकेले 2025 में रेबीज की वजह से 33 मौतें हुई. सरकार ने तब से कुत्तों के लिए वैक्सीनेशन ड्राइव और जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं. लोगों से जानवरों से होने वाली मामूली खरोंच को भी नजरअंदाज न करने और तुरंत मेडिकल मदद लेने की अपील की है. इस घटना से इलाके में चिंता फैल गई है और रेबीज से बचाव और जल्दी इलाज के बारे में ज़्यादा जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया गया है.

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