शोर को शालीनता से काटते है कावेरी कपूर के शब्द
मुंबई। अपनी हालिया स्पोकन वर्ड परफॉर्मेंस के ज़रिए अभिनेत्री, गायिका और सॉन्गराइटर कावेरी कपूर ने भावनात्मक ईमानदारी और स्पष्टता की एक ताज़ा भावना लाकर शब्दों में बात की। उनके शब्द, शोर को शालीनता से काटते हैं, और सुंदरता को कैसे माना जाता है और कैसे आत्मसात किया जाता है, इस पर एक गहरा प्रासंगिक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। अपने पोस्ट के कैप्शन में वह लिखती हैं: अपने कुछ पुराने कविताओं को पढ़ने का मन हुआ, शायद इस तरह ज़्यादा असरदार लगे? और ये वाली इस वक्त काफी प्रासंगिक भी लगी क्योंकि स्किनी फिर से ट्रेंड में है और हमें खुद से नफरत करने और खुद को तकलीफ़ देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है यह बयान उनकी ईमानदारी और तीव्र अंतर्दृष्टि को दर्शाता है – एक ऐसा संतुलन, जिसमें तीखापन भी है और अपनापन भी। कावेरी की कविता सोचने को मजबूर करती है। “हम असल में कौन हैं… संख्याओं को हटाकर?” वह इस प्रश्न के ज़रिए हमें एक ऐसी दिशा में ले जाती हैं, जहाँ हम खुद को और एक-दूसरे को अधिक कोमलता, सच्चाई और समझ के साथ देखना सीखें।
उनकी पंक्तियाँ हमें अपनी असली पहचान की ओर लौटने का न्योता देती हैं जहाँ तुलना नहीं, स्वीकार्यता है; जहाँ परिपूर्णता नहीं, सच्चाई है; और जहाँ दया, जुड़ाव और आत्म-सम्मान हमारा मार्गदर्शन करते हैं। शेखर कपूर की आगामी फिल्म ‘मासूम 2’ में अपने अभिनय के ज़रिए भी कावेरी इस भावनात्मक गहराई और संवेदनशीलता को बड़े पर्दे पर लाने के लिए तैयार हैं। चाहे अभिनय हो या कविता कावेरी कपूर लगातार हमें एक करुणामय, जागरूक और सच्चे जीवन की ओर प्रेरित कर रही हैं।

क्यों मनाया जाता है विश्व होम्योपैथी दिवस? जानें इसका इतिहास
मौसम बदलते ही डायबिटीज मरीजों पर बढ़ता खतरा, ऐसे रखें अपना ध्यान
David Warner ने ड्राइविंग से पहले शराब पीने की बात कबूली
Rani Durgavati Vishwavidyalaya में डॉ. सुरेंद्र सिंह बने छात्र कल्याण अधिष्ठाता
ईरान तनाव के बीच भारत-बांग्लादेश कूटनीति तेज, डोभाल-खलीलुर रहमान की डिनर मीट पर सबकी निगाह
शहर में दो दिन तक मिलेगा जैविक सब्जियों का स्वाद