CGTN सर्वे: नेटिजनों ने चीन के औद्योगिक नवाचार को सराहा
चीन। वर्ष 2026 चोंगुक्वानछुन मंच का वार्षिक सम्मेलन बुधवार को पेइचिंग में उद्घाटित हुआ। यह मंच चीन की वैज्ञानिक व तकनीकी प्रगति की स्थिति को जानने की अहम खिड़की माना जाता है।चाइना मीडिया ग्रुप के अधीन सीजीटीएन द्वारा वैश्विक नेटिजनों के बीच किए गए सर्वे के मुताबिक 90 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि सृजन से केंद्रित वैज्ञानिक व तकनीकी स्पर्द्धा चतुर्मुखी राष्ट्रीय शक्ति की स्पर्द्धा का फोकस है।वर्ष 2007 में स्थापित इस मंच का शाश्वत मुख्य विषय सृजन और विकास है ।इस साल के सम्मेलन में 100 से अधिक देशों और क्षेत्रों के करीब एक हजार अतिथि इस में भाग ले रहे हैं ।सीजीटीएन के इस सर्वे के परिणामों से जाहिर है कि 84.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं का विचार है कि चोंगक्वानछुन मंच विश्व के वैज्ञानिकों ,उद्यमियों और निवेशकों के लिए आदान-प्रदान का मंच है। 89.4 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि यह मंच न सिर्फ चीनी वैज्ञानिक व तकनीकी उपलब्धियों को दिखाने का मंच है ,बल्कि वैश्विक वैज्ञानिक व तकनीकी शासन में चीन की भागीदारी की अहम खिड़की है। अगले पाँच वर्षों में चीन के पूरे समाज के अनुसंधान और विकास का खर्च प्रति साल 7 प्रतिशत से बढ़ जाएगा ।वैज्ञानिक व तकनीकी नवाचार चीनी आधुनिकीकरण के केंद्रीय स्थान पर रखा गया है ।इस सर्वे में 92.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने विश्वास जताया कि चीन संसाधन एकत्र कर महत्वपूर्ण क्षेत्रों की तकनीकी चुनौतियों को दूर कर सकता है। 84.1 प्रतिशत लोगों का विचार है कि चीन की विशाल आबादी और विशाल बाजार वैज्ञानिक व तकनीकी उपलब्धियों को वास्तविक प्रयोग में लाने के लिए स्थिति तैयार करेगा ।इसके अलावा इस सर्वे में 84.9 प्रतिशत लोगों ने माना कि चीन वैज्ञानिक व तकनीकी नवाचार में जिस तरह के खुलेपन,सहयोग और साझी जीत का रुख अपनाता है ,वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अधिक मौके प्रदान करेगा।

राशिफल 3 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
विकसित भारत की कल्पना हो रहा है साकार
औजार खरीदी अनुदान योजना- विदिशा के श्रमिक देवेंद्र शर्मा को ₹5000 की सहायता, कार्य में बढ़ी दक्षता
चारधाम यात्रा: 9.67 लाख सिलिंडरों की मांग, रोजाना 6000+ सप्लाई के साथ सरकार अलर्ट पर
अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई ने वर्ष 2025-26 में दिखाया मास्टर क्लास प्रदर्शन
वन विभाग की बड़ी उपलब्धि : बारनवापारा का रामपुर ग्रासलैंड फिर हुआ काले हिरणों से आबाद