ट्विशा शर्मा मामले में जांच के बीच शव संरक्षण बना चुनौती
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक नया मोड़ आ गया है। कोर्ट की तरफ से जारी आदेश के बाद अब भोपाल पुलिस और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के सामने शव को संभालकर रखने की एक बहुत बड़ी तकनीकी समस्या खड़ी हो गई है। दरअसल, अदालती आदेश के तहत शव को सुरक्षित रखना तो जरूरी है, लेकिन फॉरेंसिक जांच के नियमों के मुताबिक शव को लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए जितने ठंडे तापमान की जरूरत है, वैसी व्यवस्था फिलहाल पूरे मध्य प्रदेश में कहीं भी मौजूद नहीं है।
माइनस 80 डिग्री तापमान की बड़ी तकनीकी चुनौती
फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस शव को लंबे समय तक पूरी तरह सुरक्षित रखना है, तो इसके लिए बेहद ठंडे यानी माइनस 80 डिग्री (-80°C) तापमान वाले डीप फ्रीजर की आवश्यकता होगी। इतनी एडवांस और खास सुविधा इस समय मध्य प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल या फॉरेंसिक लैब में उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में ट्विशा के शव को भोपाल के एम्स (AIIMS) अस्पताल के फ्रीजर में महज माइनस 4 डिग्री (-4°C) तापमान पर रखा गया है, जो लंबे समय के लिए काफी नहीं है।
पुलिस ने मृतका के पिता को लिखा भावुक पत्र
शव को रखे हुए अब 5 दिन से भी ज्यादा का समय बीत चुका है और कम तापमान की वजह से इसके खराब होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी गंभीर तकनीकी समस्या को देखते हुए भोपाल पुलिस ने अब एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस प्रशासन की तरफ से मृतका ट्विशा शर्मा के पिता को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है। इस पत्र के जरिए पुलिस ने पिता से आग्रह किया है कि वे अस्पताल आकर बेटी के शव को अपने सुपुर्द ले लें, ताकि समय रहते आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

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