बिना वैध अनुमति इलाज कर रहे 32 पाकिस्तानी डॉक्टर, जांच तेज
इंदौर। शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर मंगलवार को बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब जनसुनवाई में 32 डॉक्टरों के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई। आरोप है कि ये डॉक्टर कथित तौर पर बिना वैध लाइसेंस और संदिग्ध पाकिस्तानी डिग्रियों के आधार पर शहर के अलग-अलग क्लिनिकों और अस्पतालों में इलाज कर रहे हैं। शिकायत सामने आते ही कलेक्टर ने मामले की गंभीरता देखते हुए जांच अपर कलेक्टर को सौंप दी।मंगलवार को हुई जनसुनवाई में एक आवेदक द्वारा शहर में धड़ल्ले से चल रहे फर्जी डॉक्टर के रैकेट पर सर्जिकल स्ट्राइक चलाने की मांग की। लिखित में शिकायत देते हुए आवेदक ने कहा कि डॉ. पंजवानी व डॉक्टर बागेचा द्वारा एक महिला का गलत इलाज करने से मौत और उक्त प्रकरण के उच्च न्यायालय के संज्ञान में आने के बाद एफआईआर दर्ज होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं खुल रही है।उक्त जांच में डॉक्टरों की डिग्रियां तक फर्जी निकलने के बाद कोई जांच अभियान नहीं चलाया जा रहा है, जबकि इंदौर में 32 पाकिस्तानी डॉक्टर शहर में विभिन्न स्थानों पर क्लिनिक व हॉस्पिटलों में कार्य कर रहे हैं। शिकायतकर्ता अधिवक्ता चर्चित शास्त्री का आरोप है कि शहर में वर्षों से फर्जी डिग्रियों के सहारे इलाज का खेल चल रहा है और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है। सीएमएचओ माधव हसानी पर आवेदक ने गंभीर आरोप लगाए हैं।सूचना के अधिकारों का उल्लंघन शिकायतकर्ता ने बताया कि 3 फरवरी को सूचना के अधिकार के तहत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से इन डॉक्टरों के लाइसेंस, पंजीयन और डिग्रियों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद 9 मार्च को अपील की गई। क्षेत्रीय स्वास्थ्य संचालक ने 24 मार्च को सात दिन में दस्तावेज उपलब्ध कराने के आदेश दिए, फिर भी कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया। आवेदक ने सवाल उठाए कि अगर ये डॉक्टर वैध हैं तो दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए? और यदि अवैध हैं तो इतने वर्षों से मरीजों की जान से खिलवाड़ कैसे होता आ रहा है। कलेक्टर ने तत्काल एडीएम नवजीवन पंवार को जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता ने सभी फर्जी डॉक्टरों के नाम की सूची भी उपलब्ध कराई और कहा कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि बिना लाइसेंस या संदिग्ध डिग्रीधारी लोग इलाज कर रहे हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि आम जनता की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ है।

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