संवेदनशील मामले में लापरवाही? कोर्ट ने CID जांच के दिए निर्देश
कोल्हापुर। बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने वर्ष 2025 में एक आश्रम स्कूल में नाबालिग छात्रा के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति वृषाली जोशी और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्थानीय पुलिस द्वारा की गई जांच को बेहद लचर और लापरवाही भरा करार दिया है। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आगे की जांच महाराष्ट्र आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को सौंपने का सख्त निर्देश दिया है।
पुलिस की उदासीनता पर अदालत की कड़ी फटकार
न्यायालय ने जांच अधिकारी के ढीले-ढाले रवैये पर गहरी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान जब यह तथ्य सामने आया कि केस डायरी के नाम पर पुलिस ने केवल कुछ ढीली कागजी शीटें फाइल में लगा रखी थीं, तो पीठ ने इसे कानून और न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बताया। जजों ने टिप्पणी की कि जांच दल को पॉक्सो अधिनियम के बुनियादी कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी नहीं है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है। इस लापरवाही के चलते अदालत ने पुलिस अधीक्षक को तलब कर उनसे जवाब-तलब किया।
महिला अधिकारी की उपलब्धता पर पुलिस का अजीब तर्क
अदालत में पुलिस अधीक्षक ने जब यह दावा किया कि जांच के लिए विभाग में कोई महिला आईपीएस अधिकारी उपलब्ध नहीं थी, तो पीठ ने इस पर भारी आश्चर्य व्यक्त किया। न्यायाधीशों ने इस तर्क को पुलिस की अयोग्यता और गंभीर चूक माना। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस अधीक्षक का यह जवाब न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह दर्शाता है कि पुलिस तंत्र ने मामले को कितनी गैर-जिम्मेदाराना तरीके से लिया है। ऐसी स्थिति ने न्यायालय में भविष्य की निष्पक्ष जांच को लेकर भी गंभीर संदेह पैदा कर दिया।
मामले की जांच अब सीआईडी के हाथ में
पीड़ित के परिजनों द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने मामले को राज्य की सीआईडी को स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। अदालत ने सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी करने के लिए कहा है। आश्रम स्कूल के प्रधानाध्यापक और एक शिक्षक पर नाबालिग को शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने और अनुचित व्यवहार के आरोप हैं, जिस पर भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही जारी है। अब सीआईडी की देखरेख में पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

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