अतिथि शिक्षकों का दर्द, नौकरी के लिए अधिकारियों के पैर छूने का आरोप; जॉइनिंग प्रक्रिया पर उठे सवाल
मुरैना: मध्य प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा अतिथि शिक्षकों की ब्लॉक स्तर पर नियुक्तियां की जा रही हैं। परंतु, चंबल अंचल के मुरैना जिले से एक ऐसा हृदयविदारक और हैरान करने वाला प्रशासनिक मामला प्रकाश में आया है, जिसने समूची सरकारी व्यवस्था, पारदर्शिता और दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जिले में एक बेरोजगार लेकिन उच्च शिक्षित युवा को सरकारी स्कूल में केवल अपनी नियमानुसार जॉइनिंग (कार्यभार ग्रहण) पाने के लिए स्थानीय शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि पीड़ित युवा अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ने और उनके पैर छूकर न्याय की भीख मांगने तक को विवश नजर आ रहा है, जिसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
रिठौरा हाई स्कूल में संस्कृत शिक्षक की नियुक्ति को लेकर फंसा पेंच, नियमों की अनदेखी का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह शर्मनाक वाकया मुरैना विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय रिठौरा हाई स्कूल का है। इस विद्यालय में संस्कृत विषय के अतिथि शिक्षक के रूप में राघवेंद्र पाठक पिछले शैक्षणिक सत्र में पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे थे। स्कूल शिक्षा विभाग के वर्तमान नियमों के तहत, इस वर्ष भी उन्होंने पूरी तरह से पारदर्शी ऑनलाइन चॉइस फिलिंग प्रक्रिया के माध्यम से इसी रिठौरा हाई स्कूल का चयन किया था, जहां उनका स्कोरकार्ड मेरिट में सबसे ऊपर था।
अतिथि शिक्षक राघवेंद्र पाठक का सीधा और गंभीर आरोप है कि विद्यालय में संस्कृत शिक्षक का पद पूरी तरह रिक्त होने और ऑनलाइन पोर्टल पर नाम अलॉट होने के बावजूद, रिठौरा हाई स्कूल के वर्तमान प्राचार्य शिवशंकर तिवारी उन्हें जानबूझकर जॉइनिंग लेटर नहीं दे रहे हैं और न ही उन्हें स्कूल में कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति प्रदान कर रहे हैं।
बेरोजगारी का फायदा उठाने और साठगांठ कर अवैध रूप से पैसों की मांग करने का संगीन आरोप
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पिछला विवाद: पीड़ित शिक्षक राघवेंद्र पाठक ने स्कूल प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप मढ़ते हुए कहा कि पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान भी पद पर बने रहने के एवज में उनसे कथित रूप से मोटी रकम (रिश्वत) की मांग की गई थी।
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मजबूरी और हताशा: उन्होंने रोते हुए अपनी व्यथा सुनाई कि वे एक अत्यंत गरीब परिवार से आते हैं और लंबे समय से बेरोजगार हैं। पैसे न होने के कारण वे प्राचार्य की इस कथित अनुचित मांग को पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ रहे, जिसके प्रतिशोध में इस बार पोर्टल पर नाम आने के बाद भी उन्हें जानबूझकर जॉइनिंग से वंचित कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
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पक्ष आना बाकी: हालांकि, इन आरोपों की अभी तक विभाग द्वारा कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और संबंधित स्कूल प्राचार्य व दूसरे पक्ष का विस्तृत बयान आना अभी बाकी है।
कलेक्टर से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर में पैर छूकर न्याय की गुहार, पर ढाक के तीन पात
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अधिकारियों की उदासीनता: पीड़ित अतिथि शिक्षक का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से न्याय की आस में जिला मुख्यालय पर कलेक्टर कार्यालय (कलेक्ट्रेट) से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के दफ्तरों के लगातार चक्कर काट रहे हैं।
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प्रशासनिक संवेदनहीनता: राघवेंद्र पाठक का आरोप है कि व्यवस्था से हताश होकर उन्होंने कई बार जिम्मेदार शिक्षा अधिकारियों के चेंबर में जाकर उनके सामने हाथ जोड़े, पैर छुए और रो-रोकर अपने बूढ़े माता-पिता की बेबसी का वास्ता दिया। परंतु, चंबल संभाग के इस संवेदनशील मामले में इतने दिन बीत जाने के बाद भी किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने उनकी लिखित शिकायत पर कोई ठोस, दंडात्मक या सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की है, जिससे वे गहरे अवसाद में चले गए हैं।
पारदर्शिता के दावों की खुली पोल, उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ होगी हकीकत
मुरैना: अतिथि शिक्षक की लाचारी का यह मामला अब मध्य प्रदेश की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की सुचिता, पारदर्शिता और ग्राउंड जीरो पर भ्रष्टाचार मुक्त ट्रांसफर-पोस्टिंग के दावों पर एक बड़ा और गहरा सवालिया निशान लगा रहा है। एक तरफ जहां सरकार युवाओं को रोजगार देने और सम्मान देने की बात कह रही है, वहीं दूसरी तरफ मुरैना की यह तस्वीर व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करती है।
अतिथि शिक्षक संघों ने भी इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और चेतावनी दी है कि यदि राघवेंद्र पाठक के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें तुरंत रिठौरा हाई स्कूल में जॉइनिंग नहीं दी गई और दोषी पाए जाने वाले भ्रष्ट अधिकारियों व प्राचार्यों पर सख्त कानूनी गाज नहीं गिरी, तो वे पूरे जिले में उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। बहरहाल, अब जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक और विधिक स्थिति साफ हो सकेगी।

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