आचार संहिता केस में भूपेश बघेल की बढ़ीं मुश्किलें, हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करने से किया इनकार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनाव आचार संहिता के कथित उल्लंघन से जुड़े एक मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। उच्च न्यायालय ने भूपेश बघेल की उस अंतरिम अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दायर चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) को शुरुआती स्तर पर ही निरस्त करने की मांग की थी। अदालत के इस फैसले के बाद अब इस पूरे संवेदनशील मामले की सुनवाई गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर आगे बढ़ेगी।
क्या है आचार संहिता उल्लंघन का पूरा मामला?
अदालत में लंबित इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई थीं। याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर उनके निर्वाचन (विधायक के रूप में चुनाव) को पूरी तरह से अवैध और शून्य घोषित करने की मांग अदालत से की है। हाई कोर्ट द्वारा भूपेश बघेल की तकनीकी अर्जी खारिज किए जाने के बाद, अब इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई आगामी 23 जून को मुकर्रर की गई है।
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने की है शिकायत
गौरतलब है कि भूपेश बघेल की विधानसभा सदस्यता खत्म करने की मांग को लेकर यह चुनाव याचिका दुर्ग के वर्तमान सांसद विजय बघेल द्वारा दायर की गई है। वर्ष 2024 में दाखिल की गई इस याचिका में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान, मतदान से ठीक पहले जब आधिकारिक तौर पर प्रचार का समय समाप्त हो चुका था (साइलेंस पीरियड), तब भूपेश बघेल ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ पाटन विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ी रैली और रोड शो का आयोजन किया था।
शिकायत के अनुसार, इस प्रतिबंधित अवधि के दौरान उन्होंने न सिर्फ चुनावी नारे लगवाए बल्कि मतदाताओं से सीधे वोट भी मांगे, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का स्पष्ट और सीधा उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम और रोड शो की बकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसे साक्ष्य के रूप में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। अब देखना होगा कि 23 जून को होने वाली सुनवाई में कोर्ट का क्या रुख रहता है|

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