खैरागढ़: छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के अंतर्गत आने वाले टोलगांव से सामाजिक कुरीतियों और मानसिक प्रताड़ना का एक बेहद ही झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। गांव के एक 70 वर्षीय बुजुर्ग सुखराम साहू ने समाज के कुछ रसूखदार लोगों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। बुजुर्ग का कहना है कि उनकी पोती द्वारा प्रेम विवाह (लव मैरिज) करने की सजा पूरे परिवार को दी जा रही है। आरोप है कि समाज से हुक्का-पानी बंद करने और बहिष्कार करने की धमकी देकर उनसे जबरन 55 हजार रुपये का आर्थिक दंड (जुर्माना) वसूला गया और इसके बाद भी पूरे समाज को बकरा-भाद (सामूहिक भोज) कराने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

पोती के प्रेम विवाह की पूरे परिवार को मिली तालिबानी सजा

पीड़ित बुजुर्ग सुखराम साहू के मुताबिक, उनके परिवार की एक बालिग युवती ने कुछ समय पहले अपनी मर्जी से प्रेम विवाह कर लिया था। युवती के इस फैसले को गांव के कुछ ठेकेदारों ने पूरे समाज की प्रतिष्ठा से जोड़ दिया और परिवार का सामाजिक उत्पीड़न शुरू कर दिया।

  • आर्थिक शोषण: परिवार को समाज से अलग-थलग करने का डर दिखाकर पंचायती फरमान सुनाया गया और डरा-धमकाकर 55 हजार रुपये ऐंठ लिए गए।

  • सामूहिक भोज का दबाव: मोटी रकम वसूलने के बाद भी प्रताड़ना का दौर थमा नहीं; पीड़ित परिवार पर पूरे गांव को भारी-भरकम भोज कराने का फरमान थोप दिया गया, जिससे गरीब परिवार कर्ज के दलदल में धंसने को मजबूर हो गया।

प्रताड़ना और सदमे के कारण बुजुर्ग महिला ने तोड़ा दम

इस सामाजिक लांछन और लगातार मिल रही धमकियों का असर परिवार की महिलाओं के स्वास्थ्य पर बेहद घातक पड़ा। सुखराम साहू ने रुंधे गले से बताया कि समाज के इस बर्ताव से उनकी बुजुर्ग पत्नी जमुना बाई गहरे मानसिक सदमे (कड़ा आघात) में चली गईं।

  • अस्पताल में भी नहीं छोड़ा पीछा: जमुना बाई पहले से ही अस्वस्थ थीं, और इस तनाव के कारण उनकी हालत और बिगड़ गई। उन्हें और घर की बहू को गंभीर हालत में रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।

  • इलाज के दौरान मौत: जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए आखिरकार जमुना बाई ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पीड़ित का आरोप है कि जब उनकी पत्नी और बहू रायपुर के अस्पताल में जिंदगी की अंतिम सांसें गिन रही थीं, तब भी गांव के कुछ संवेदनहीन लोग फोन पर पैसों की मांग कर रहे थे और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।

तपती धूप में न्याय के लिए भटक रहे पैर: खैरागढ़ से राजनांदगांव तक गुहार

इस अमानवीय घटनाक्रम के बाद पीड़ित बुजुर्ग सुखराम साहू ने हौसला नहीं हारा और दोषियों को सजा दिलाने के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया है।

अधिकारी/कार्यालय स्थान की गई कार्रवाई
थाना प्रभारी खैरागढ़ लिखित शिकायत दर्ज कराकर नामजद एफआईआर की मांग की।
आईजी कार्यालय राजनांदगांव उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच के लिए आवेदन सौंपा।
कलेक्टर कार्यालय खैरागढ़ प्रशासनिक हस्तक्षेप और परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई।

तपती और चिलचिलाती धूप में, आंखों में आंसू लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे इस बुजुर्ग की प्रशासनिक चौखट पर लगी दौड़ अब पूरे इलाके में भारी चर्चा और आक्रोश का विषय बन चुकी है।

प्रशासनिक रुख और जांच शुरू

छत्तीसगढ़ में सामाजिक बहिष्कार (हुक्का-पानी बंद करना) कानूनन एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। शिकायत दर्ज होने के बाद खैरागढ़ पुलिस और स्थानीय जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने टोलगांव के संबंधित पक्षों से पूछताछ और जांच की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि कोई और परिवार इस तरह की प्रताड़ना का शिकार न हो।