नई दिल्ली। भारतीय समाज में सोना केवल एक आभूषण नहीं है, बल्कि यह हर परिवार के लिए संकट का साथी और सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। शादियों से लेकर विपरीत परिस्थितियों तक, देश के कोने-कोने में इसे सबसे सुरक्षित निवेश का जरिया माना गया है। हालांकि, मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए अब सोने को सिर्फ परंपरा के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। बढ़ते आयात खर्च, डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सोने की अनियंत्रित खरीद देश की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन रही है। ऐसे में आर्थिक जानकारों का मानना है कि सोना खरीदना गलत नहीं है, लेकिन इसके तरीकों में बदलाव लाना अब वक्त की मांग है।

क्यों चिंता का विषय बन रहा है सोने का अंधाधुंध आयात?

भारत वैश्विक स्तर पर सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। आंकड़ों के अनुसार, भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है, जिसका बाजार मूल्य 5 लाख करोड़ डॉलर से भी अधिक है। बड़ी बात यह है कि देश अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात (इंपोर्ट) करता है। इससे देश के चालू खाता घाटे (CAD) पर सीधा असर पड़ता है और रुपये की स्थिति कमजोर होती है। यही वजह है कि देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी समय-समय पर लोगों से बिना वजह सोने की खरीदारी में थोड़ी कमी लाने का आग्रह किया जाता रहा है।

गहने और शुद्ध निवेश के अंतर को समझना बेहद जरूरी

वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक, आम लोग अक्सर व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीदे जाने वाले गहनों और शुद्ध निवेश के बीच का अंतर नहीं समझ पाते। शादी-ब्याह के लिए आभूषण खरीदना एक सामाजिक जरूरत है, लेकिन केवल बचत या मुनाफे के लिए फिजिकल ज्वेलरी खरीदना घाटे का सौदा हो सकता है। पारंपरिक आभूषणों की खरीद में भारी मेकिंग चार्ज, जीएसटी और रिटेलर मार्जिन जुड़ा होता है, जिसके कारण ग्राहक को सोने की वास्तविक कीमत से काफी ज्यादा भुगतान करना पड़ता है।

डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ बन रहे हैं पहली पसंद

बदलते दौर में अब शहरी निवेशकों का रुझान भौतिक सोने (फिजिकल गोल्ड) के बजाय डिजिटल विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ा है। साल 2025 में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में तकरीबन 43 हजार करोड़ रुपये का बड़ा निवेश दर्ज किया गया। इसके अलावा, आजकल 'गोल्ड वॉल्ट' जैसे आधुनिक विकल्प भी लोकप्रिय हो रहे हैं। इसके तहत निवेशक कमोडिटी मार्केट (MCX) के लाइव रेट पर सोना-चांदी खरीद सकते हैं, जो सुरक्षित वॉल्ट में जमा रहता है और जरूरत पड़ने पर इसकी फिजिकल डिलीवरी भी ली जा सकती है। इसमें शुद्धता की पूरी गारंटी और पारदर्शिता मिलती है।

लंबी अवधि की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का संतुलन

एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सोने को रातों-रात अमीर बनने या त्वरित मुनाफे का जरिया नहीं मानना चाहिए। इसे अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का एक संतुलित हिस्सा (लगभग 10 से 15 फीसदी) बनाना ही समझदारी है। वैश्विक तनाव और महंगाई के दौर में सोना एक बेहतरीन सुरक्षा कवच जरूर है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने के लिए भी यह जरूरी है कि हम आभूषणों के रूप में लॉकर में सोना डंप करने के बजाय डिजिटल और पारदर्शी माध्यमों को अपनाएं।