बाबा बागनाथ मंदिर में ऐसी परंपरा, किसी के अंतिम संस्कार वाले दिन कुछ नहीं खाते भोलेनाथ
बागेश्वर: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बाबा बागनाथ मंदिर में एक अनूठी और संवेदनशील धार्मिक परंपरा निभाई जाती है। सरयू, गोमती और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्थित इस मंदिर के समीप बने श्मशान घाट में जब भी किसी का अंतिम संस्कार (शवदाह) हो रहा होता है, तब भगवान शिव को दाल-भात का नियमित भोग नहीं लगाया जाता है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल के अनुसार, भगवान शिव 'श्मशानवासी' हैं और आसपास शोक का माहौल होने पर उन्हें भोजन अर्पित करना उचित नहीं माना जाता। यदि पूरे दिन अंतिम संस्कार का सिलसिला चलता रहे, तो मंदिर में भोग की प्रक्रिया स्थगित रहती है, हालांकि नियमित आरती और दर्शन जारी रहते हैं। धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए दिनभर के शोक के बाद रात की आरती में मिठाई का भोग लगाया जाता है। स्थानीय लोग इस परंपरा को कुमाऊं की गहरी संवेदना और संस्कृति का प्रतीक मानते हैं।

वनाधिकार पट्टा और पीएम आवास से मुरिया परिवार को मिला नया जीवन
वर्मी कंपोस्ट उत्पादन बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल
राज्यपाल पटेल से भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी मिले
मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिये करें समन्वित प्रयास : मंत्री कुशवाह
लेमनग्रास -किसानों के लिए कम पानी में ज्यादा कमाई का साधन