छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट सख्त, 101 दिन की देरी माफ करने से इनकार
रायपुर|छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नेशनल हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा विवाद में दायर अपील पर सख्त रुख अपनाते हुए 101 दिन की देरी माफ करने से इनकार कर दिया. इसके साथ ही कोर्ट ने केवल देरी के आधार पर ही पूरी अपील को खारिज कर दिया. यह आदेश न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने पारित किया. मामला लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता द्वारा दायर आर्बिट्रेशन अपील से संबंधित था|
क्या है पूरा मामला?
मामला नेशनल हाईवे-200 (नया एनएच-49) के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है. अधिग्रहण के बाद 16 अप्रैल 2018 को सक्षम प्राधिकारी (सीएएलए) ने मुआवजा निर्धारित किया था|
इससे असंतुष्ट होकर जमीन मालिक चमेली बाई ने मुआवजा बढ़ाने के लिए आवेदन किया. मामले में नियुक्त आर्बिट्रेटर ने स्वयं मुआवजा तय करने के बजाय प्रकरण को पुनः सीएएलए के पास संशोधित अवॉर्ड के लिए भेज दिया. पीडब्ल्यूडी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए जिला न्यायालय में आवेदन लगाया, लेकिन 27 सितंबर 2024 को जिला कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद विभाग ने हाई कोर्ट में अपील दायर की, जिसमें 101 दिन की देरी हुई|
कोर्ट ने क्यों ठुकराया आवेदन?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 101 दिन की देरी काफी अधिक है. दिए गए कारण सामान्य और अस्पष्ट हैं. केवल प्रशासनिक कारण पर्याप्त कारण नहीं माने जा सकते. कोर्ट ने कहा कि देरी माफी कोई अधिकार नहीं, बल्कि न्यायालय का विवेकाधिकार है. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि आर्बिट्रेशन मामलों में समयसीमा का सख्ती से पालन जरूरी है. तय अवधि के बाद देरी को अपवाद के रूप में ही माफ किया जा सकता है. लापरवाही या ढिलाई की स्थिति में राहत नहीं दी जा सकती. हाई कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण साबित करने में असफल रहा है. इस आधार पर 101 दिन की देरी माफ करने का आवेदन खारिज किया गया साथ ही पूरी आर्बिट्रेशन अपील भी निरस्त कर दी गई|

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