पक्के घर का सपना हुआ साकार, पीढ़ियों का ’कच्चा मकान’ छोड़ अब पक्के आवास में मुस्कुरा रहा है सुखराम का परिवार
रायपुर : “हर जन का बस एक ही सपना, अपनी भूमि पर पक्का घर हो अपना।“ इस ध्येय वाक्य को सरगुजा जिले के जनपद पंचायत सीतापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत रायकेरा के सुखराम ने सच कर दिखाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) उनके जीवन में केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा की नई गारंटी बनकर आई है।
दशकों का संघर्ष और कच्ची छत की मजबूरी
सुखराम और उनका परिवार पिछले कई पीढ़ियों से रायकेरा में निवास कर रहा है। रोटी और कपड़े की बुनियादी जरूरतों को किसी तरह पूरा करने के बाद, एक पक्के मकान का सपना उनके लिए महंगाई के इस दौर में नामुमकिन सा लगता था। सुखराम बताते हैं कि उनका पुराना घर कच्चा था, जहाँ एक ही कमरे में खाना बनाना, सोना और रहना होता था। बारिश के दिनों में कच्ची छत से टपकते पानी और ढहने के डर के साये में पूरा परिवार रातें गुजारता था।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से बदली तकदीर
सुखराम के जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब उनका चयन प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत हुआ। योजना के अंतर्गत मिली वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने अपने सपनों का पक्का घर तैयार किया। आवास पूर्ण होने के बाद, अब उनका परिवार पक्की छत के नीचे सुरक्षित महसूस करता है।
खुशियों का नया आशियाना
पक्का आवास मिल जाने से न केवल सुखराम के रहन-सहन का स्तर सुधरा है, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य के लिए भी एक स्थिर आधार तैयार हुआ है। सुखराम भावुक होकर बताते हैं कि, पक्का आवास पाकर ऐसा लगता है मानो जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा हो गया। अब हमें कच्चे घर की परेशानियों से मुक्ति मिल गई है और हम सपरिवार खुशी-खुशी अपने नए घर में रह रहे हैं।
सुखराम ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए केंद्र और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। जिला प्रशासन के सतत प्रयास से सरगुजा जिले के सुदूर अंचलों में सुखराम जैसे हजारों हितग्राही आज अपनी पक्की छत के नीचे एक गरिमामय जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

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