ब्याज दरों में कटौती और त्योहारी मांग से सोने की चमक बढ़ेगी, एफपीआई ने निकाले करोड़ों
व्यापार: वैश्विक चुनौतियों और कई देशों में तनाव के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने सितंबर में अब तक शेयर बाजार से 7,945 करोड़ निकाले हैं। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में 34,990 करोड़ और जुलाई में 17,700 करोड़ रुपये की भारी निकासी के बाद विदेशी निवेशकों ने 2025 में अबतक कुल 1.38 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे भी निकासी जारी रहेगी।
ब्याज दर घटने व त्योहारी मांग से सोने में रहेगी तेजी
वैश्विक मौद्रिक नीतियों में ढील, एशिया में त्योहारी मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से आगामी सप्ताह में सोने की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है। विश्लेषकों ने कहा कि व्यापारी अमेरिका और भारत के बीच होने वाली आगामी व्यापार वार्ताओं, साथ ही वाशिंगटन और बीजिंग के बीच बातचीत पर बारीकी से नजर बनाए रखेंगे। आवास संबंधी आंकड़े, उपभोग खर्च जैसे आंकड़े बाजार की धारणा को प्रभावित करेंगे।
नौ शहरों में चार फीसदी घट सकती है मकानों की बिक्री
मुंबई और पुणे में कमजोर मांग के कारण देश के नौ प्रमुख शहरों में जुलाई-सितंबर तिमाही में घरों की बिक्री चार फीसदी घटकर एक लाख इकाई रह सकती है। मानसून और श्राद्ध के कारण यह तिमाही आमतौर पर कमजोर मानी जाती है। प्रॉपइक्विटी के रविवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई-सितंबर, 2025 के दौरान नौ शहरों में घरों की बिक्री चार फीसदी कम होकर 1,00,370 इकाई रह सकती है। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 1,05,081 इकाई था। मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे और पुणे में आवासीय संपत्तियों की बिक्री में गिरावट का अनुमान है। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई, बंगलूरू, हैदराबाद और कोलकाता में मांग अधिक रहेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, नई पेशकश लगातार कम होने के बावजूद आवास बाजार मजबूत बना हुआ है।
पांच साल में 88 अरब रुपये का होगा ऑनलाइन घरेलू सेवा बाजार
भारत का ऑनलाइन घरेलू सेवा बाजार 18-22 फीसदी की सालाना दर से बढ़कर 2029-30 तक 85-88 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। परामर्श फर्म रेडसीर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बाजार को सुविधा, विश्वसनीयता और बढ़ती शहरी मांग से समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्विक कॉमर्स को व्यापक रूप से अपनाने के बाद ‘तत्काल घरेलू सेवा’ भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में अगले क्षेत्र के रूप में उभर रही है। समय की कमी से जूझ रहे शहरी ग्राहकों के बीच यह तेजी से लोकप्रिय हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया, तत्काल घरेलू सेवा एक मांग आधारित घरेलू सहायता प्रणाली की तरह काम करती है, जो असंगठित घरेलू सहायकों और सेवा मंचों के बीच की खाई को पाटती है। इसमें आगे कहा गया कि भारत के घरेलू सेवा क्षेत्र में 2024-25 तक ऑनलाइन सेगमेंट कुल कारोबार का एक फीसदी से भी कम था। हालांकि, अब ऑनलाइन सेगमेंट तेजी से बढ़ रहा है। शहरी मांग से समर्थन मिलने के कारण इसके हर साल 18-22 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है।

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