अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सरकारी कंपनी को लेकर दिया अहम फैसला
वाशिंगटन। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सरकारी कंपनी एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के खिलाफ 1.29 अरब डॉलर के मध्यस्थता पुरस्कार को लागू कराने की मांग वाली याचिका को लेकर फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विदेशी संप्रभु प्रतिरक्षा अधिनियम (एफएसआईए) के तहत भारत के खिलाफ यह मुकदमा अमेरिकी अदालतों में आगे बढ़ सकता है, और इसके लिए एंट्रिक्स के अमेरिका से न्यूनतम संपर्क होने की आवश्यकता नहीं है।
बता दें कि एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की कॉमर्शियल शाखा है। यूएस कोर्ट का फैसला 2023 में नाइंथ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स द्वारा दिए गए आदेश को पलटता है, जिसमें कहा गया था कि एंट्रिक्स का अमेरिका से पर्याप्त कनेक्शन नहीं हैं, इसलिए अमेरिकी अदालतों को उसके खिलाफ मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं है। यूएस सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सैमुअल एलिटो ने सर्वसम्मत फैसले में लिखा, “जब प्रतिरक्षा से छूट लागू होती है और उचित सेवा दी गई होती है, तब एफएसआईए के तहत व्यक्तिगत क्षेत्राधिकार मौजूद होता है। नाइंथ सर्किट कोर्ट ने इससे अधिक की मांग की थी, जो गलत है।”
विवाद की जड़ 2005 में हुई डील है, जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की व्यावसायिक शाखा एंट्रिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बेंगलुरु स्थित देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया था। इसके तहत देवास को दो सैटेलाइट के ट्रांसपोंडर लीज पर मिलने थे ताकि वह भारत में एस-बैंड स्पेक्ट्रम पर मल्टीमीडिया सेवाएं दे सके। इस सौदे की लागत 167 करोड़ रुपये थी और इसका उद्देश्य भारत में मोबाइल उपकरणों पर मल्टीमीडिया सेवाएं प्रदान करना था।

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